National Cooperative Policy 2025–2045: गांवों में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की नई क्रांति
भारत सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए National Cooperative Policy 2025–2045 की घोषणा की है। यह नीति अगले 20 वर्षों तक सहकारी संस्थाओं के माध्यम से देश के गांव-गांव तक आर्थिक विकास की रोशनी पहुँचाने का लक्ष्य रखती है। गृहमंत्री अमित शाह ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस नीति के तहत हर गांव में कम से कम एक सहकारी संस्था (Cooperative) स्थापित की जाएगी।
इस नीति की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत की लगभग 65% आबादी गांवों में निवास करती है। यहां पर रोजगार, कर्ज सुविधा, मार्केटिंग और उत्पादन संसाधनों की भारी कमी है। बिचौलियों और निजी एजेंसियों के भरोसे रहने के कारण किसानों और ग्रामीण युवाओं को अपने उत्पाद और श्रम का सही मूल्य नहीं मिल पाता। इस कमी को दूर करने के लिए सहकारी संस्थाएं सबसे बड़ा हथियार बन सकती हैं। इन्हीं संस्थाओं को मजबूत करने के लिए यह नीति लाई गई है।
नीति के मुख्य लक्ष्य:
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हर गांव में Cooperative Organisation
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2026 तक 2 लाख PACS (Primary Agricultural Credit Societies) की स्थापना
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ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना
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महिलाओं और युवाओं की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करना
इस नीति के प्रमुख लाभ:
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किसानों को सस्ते कर्ज की सुविधा – PACS के माध्यम से किसान बिना किसी बिचौलिये के सीधा सहकारी संस्था से कर्ज ले सकेंगे।
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रोजगार के अवसर – गांवों में PACS और अन्य Cooperative Societies के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और नौकरी दोनों के अवसर मिलेंगे।
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महिला सशक्तिकरण – महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए विशेष महिलाओं की सहकारी संस्थाएं बनाई जाएंगी।
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मार्केटिंग सुविधा – किसान अपनी उपज को सहकारी मंडियों के जरिए सीधा बाजार में बेच सकेंगे।
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स्थिर मूल्य – किसानों को अपनी फसल और उत्पाद का निश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सहकारी मंडियों में मिलेगा।
किन-किन क्षेत्रों में होगा असर?
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कृषि कर्ज और बैंकिंग सुविधा
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बीज, खाद और कृषि उपकरण की उपलब्धता
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महिला व युवा स्वरोजगार
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खाद्य प्रसंस्करण यूनिट का संचालन
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ग्रामीण मंडियों का सशक्तिकरण
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सहकारी गोदाम और भंडारण सुविधा
इसे लागू कैसे किया जाएगा?
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केंद्र और राज्य सरकार मिलकर योजना बनाएंगी।
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पंचायतों को स्थानीय स्तर पर Cooperative Society के गठन की जिम्मेदारी दी जाएगी।
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PACS को बैंकिंग लाइसेंस और कर्ज वितरण की सुविधा दी जाएगी।
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महिला और युवा समितियों का गठन।
समय-सारणी (Timeline)
| वर्ष | कार्य |
|---|---|
| 2026 | 2 लाख PACS की स्थापना |
| 2030 | हर गांव में कम से कम 1 सहकारी संस्था |
| 2045 | सभी गांवों में कृषि और गैर-कृषि सहकारी संस्थाएं पूरी तरह सक्रिय |
निष्कर्ष:
National Cooperative Policy 2025–2045 ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे किसानों, महिलाओं, युवाओं और गांव के छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह नीति देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।

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